Romance & Longing
रिमझिम बरसेला सवनवां
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
रिमझिम बरसेला सवनवा हो ननदी, सइयां के बोलादऽ।
सइयां के बोला द, टेलीफोन करवा दऽ, तरसेला हमरो परनवां हो ननदी, सइयां के बोलाद ऽ ।।...........
बरखा के बुनिया तन के भिगावे। मनवां में हमरी पिरितिया जगावे ।।
रोज-रोज देखेनी सपनवां हो ननदी,. सइयां के बोलाद ऽ ।।..........
बिनु रे बलमुआं के भावे ना सवनवां । पूरा नाहीं होला कवनो मन के सपनवां ।।
रूठे पिया कवनी करनवां हो ननदी, सइयां के बोला दऽ ।।............
कोठवा अटरिया सून हमरो सेजरिया। भावे नाही सावन में हमके कजरिया ।।
हथवा में चूभेला कंगनवां हो ननदी, सइयां के बोला दऽ .............
मनवां 'अधीर' पिया सूने नाही बतिया। लिखि-लिखि भेजनी बहुत हम पतिया ।।
करे मन तेजि दीं परनवां हो ननदी, सइयां के बोला दऽ ।।............
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