राम बहादुर
अधीर पिण्डवी
कवि • गीतकार • साहित्यकार
A devoted voice of Bhojpuri and Hindi literature — preserving the soul of village life, the warmth of family, and the dignity of labour through verse.

"गँउवाँ के माटी अनमोल"
— Adheer Pindvi
Featured Poems
सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
Read Moreखिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
Read Moreशहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।
Read Moreबबुआ तू जान हमरो
कहली मइया हउवऽ बबुआ तूं जान हमरो। हमरी अँखिया के पुतरिया परान हमरो ।।...... सिमवां पर जइहऽ तऽ जनि घबरइह। डरि-डरि जनि तूहूं गोलिया चलइह ।।
Read Moreटिकुली जनि साट ऽ
कुँवारि बाडू बबुनी, टिकुली जनि साटऽ ।।....... टिकुली अउर बिदिया हऽ सुहाग के निशानी। लोगवा कही का जनि करऽ तू नादानी ।।
Read Moreपिपरा कटाव जनि सजना
निमिया के पेड़वा लगाव ऽ, पिपरा कटाव जनि सजना। जुग जुग से होला पेड़ के पुजनवां । पेड़ की पुजनवां से बढ़े जन धनवां ।।
Read MoreA Tapestry of Verse

गँउवाँ के माटी अनमोल
A complete Bhojpuri folk song & poetry collection — celebrating soil, family, faith, and the rhythm of rural life.