Village Life
रतिया चान बिना अन्हरिया लगे
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
रतिया चान बिना जइसे अन्हरिया लगे। सूनी तोहरी बिना अब सेजरिया लगे ।।
खनके पायलिया मधुर धुनि छिड़े। रहे टूटल जवन दिल फिरु से जुड़े ।।
जब तोहरी करेजवा से लगि जानी हम, स्वर्ग के सुख हमके सँवरिया लगे ।।.......
फूल बनिके चमन में महकल करींऽ। रूप सोना सा लेके हम दहकल करी ।।
भौंरा बनि तू हम पर लोभाइल कर, तोहरी आवेके जब भी खबरिया मिले ।।.......
पात तरुवर से तोहरे हम पूंछी पता। तू तऽ हउव गुलाब हम लवंग लता।
आ जालऽ तऽ बगिया महँकि जाला, दिल के भरल फूल फूलवरिया लगे ।।........
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।