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Village Life

लहरेला खेतवा में धनवां

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

लहरेला खेतवा में धनवां, देखि झूमि उठे मनवां।

मनवा में सोचे किसनवां, सच होई अबकी सपनवां ।।

खेतवा में धनवां जबसे रोपाइल । समय से पानी, समय से सोहाइल ।।

परेला फसिलिया परनवां ।। देखि........

मेहनति अबकी सफल होइ जाई। जाई बेकार नाही अबकी कमाई ।।

देखिके जुड़ाला परनवां ।।.......

खेतवा में जाके घूमि आव धनिया। करि आव जाके मन से सोहनिया।

मानऽ हमरो कहनवां ।।........

तोहके गढ़ाइबि हम नाक के नथुनिया। झुलनी पाजेब कमर के करधनिया ।।

अउरी गढ़ाइबि कंगनवां ।।........