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Romance & Longing

मेंहदी के हरियर पतिया

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

मेंहदी के हरियर पतिया में हो, बसे सजना के प्यार।

रचि-रचि रचेली हथेलिया हो, रंग होखे चटकार ।।.........

सावन मास सुहावन लागे । बहे पुरुवइया तऽ यौवन जागे ।।

बड़ी नीक लागेला सेजरिया हो, घर हो सजना हमार ।। मेंहदी..........

सावन मास खिले मेहदी के रंगवां। झुलुआ के पेंग भरीं सखियन के संगवां ।।

बड़ा नीक लागेला सवनवां हो, रिम-झिम पड़ेला फुहार ।। मेंहदी..........

रिमझिम रिमझिम सावन बरसे। सइयां बिना मोर मनवा तरसे ।।

नीक नाहीं लागेला अंगनवां हो, चले पुरुवा बेयार ।। मेंहदी..........

रतिया के चाँद खिड़िकिया से झांके। चन्दा के मुंहवा सजन जइसे लागे ।।

बड़ा नीक लागेला अंजोरिया हो, चाँद ऊगे टहकार ।। मेहदी..........