Village Life
मेहनतिया से जेकर जुटेला रोटिया
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
मेहनतिया से जेकर जुटेला रोटिया। भइया हउवऽ मजदूर तू हमार सथिया ।।
खेत-खरिहान तू ही सड़क अउर दुकान में। खटेलऽ तू घर छोड़ि कोइला खदान में ।।
हउवऽ देशवा के तू अनमोल थतिया ।।.........
बरखा ना देखऽ नाहीं लागे तोहके घमवा। मिलि जालऽ कतहूं करत तूहीं कमवां ।।
तन पर कुरुता मइल बा फटल धोतिया ।।......
नदिया के धार मोड़ि बन्हवां बनाव। खेतवा के कोड़ि खनि अन्न उपजाव ।।
तू तऽ हउवऽ समाज के नयन जोतिया ।।......
मेहनति के जवन तोहार बहेला पसेनवां। एक-एक बूंद सब बनि जाला सोनवां ।।
नाहीं केहू से बा कम तोहार अवकतिया ।।......
जब ले ना एक होइबऽ देश के मजूर तू। शोषण तोहार होई रहबऽ मजबूर तू ।।
अब होइजा बहादुर सब एक मतिया ।।........
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।