Village Life
याद सतावे ला
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
नानी की गउवां के बहुते, याद सतावेला...। रामफल नाना की अखड़ा के, दाव बोलावेला ।।
खेलनी चिक्का कबड्डी जहवां, लरिकइया में हमहूं। बचपन के सब संगी साथी, याद परेला अबहूं ।।
दुअरा के बड़का बरगद के, छाँव बोलावेला ।।...
सेमरा के पेड़वा पर चढ़िके, सुगा उतारत रहनी। उतरि ना पाईं जब नानी के खूब पुकारत रहनी ।।
चीकन डालि से सरकत हमरो पाँव बोलावेला ।।...
तिन-पेड़वा अमवा के रहे, भुतवा की संग लड़नी । गउवां की पाठशाला में हम पाँच कलास ले पढ़नी ।।
हमरो ले-लेके भुतवा नाव बोलावेला ।।...
मामी की अँचरा में देखनी बान्हल पियर दुवन्नी। बनियाइन नानी ओकरा के तुरिके कइली एकन्नी ।।
पट्टी किनि ओकरा से खइनी स्वाद लोभावेला ।।...
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।