Family Values
माई जिनगी उधार दे दऽ
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
माई हमरो के जिनगी उधार दे दऽ। जनि कोखिये में मार प्यार दे दऽ ।।
तूहूं तऽ हऊ कवनो माई के दुलारी। हम काहे लागेनी तोहरा के भारी ।।
बनि तितली उड़ीं संसार दे दऽ ।। माई.........
बाबू जी के काहें नाहीं तू समुझावेलू । काहें ना चरनियां में अँचरा बिछावेलू ।।
खेलीं गोदिया में तोहरी दुलार दे दऽ । माई
भइया के बान्हीं के रखिया कलइया। के लेई जिनगी के उनकी बलइया ।।
माई हमके सनेहिया के तार दे दऽ ।। माई.......
भले दहेज बिनु हम मारल जाइबि । दुःख होई केतनो ना तोहसे बताइबि ।।
माई हमरो के डोलिया कँहार दे दऽ । माई........
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जीवन परिचय
नाम : राम बहादुर 'अधीर पिण्डवी' पिता : (स्व०) श्री बसन्त पिण्डवी
दुलार के करी
हमरी माई अइसन हनके दुलार के करी। बिना स्वारथ के माई जइसन प्यार के करी ।। दुर्गा-देवी केतना देवता मनवली। तब जाके गोदिया में हमरा के पवली ।।
सगे भाई की तरे
सबकी दुख सुख में रहीं सगे भाई की तरे। तबो अरिया चलावे लोग कसाई की तरे ।। धरती की लोगवा के सुख पहुँचाईं। देके दवाई सबके रोगवा भगाईं ।।