Back to library
Family Values

माई जिनगी उधार दे दऽ

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

माई हमरो के जिनगी उधार दे दऽ। जनि कोखिये में मार प्यार दे दऽ ।।

तूहूं तऽ हऊ कवनो माई के दुलारी। हम काहे लागेनी तोहरा के भारी ।।

बनि तितली उड़ीं संसार दे दऽ ।। माई.........

बाबू जी के काहें नाहीं तू समुझावेलू । काहें ना चरनियां में अँचरा बिछावेलू ।।

खेलीं गोदिया में तोहरी दुलार दे दऽ । माई

भइया के बान्हीं के रखिया कलइया। के लेई जिनगी के उनकी बलइया ।।

माई हमके सनेहिया के तार दे दऽ ।। माई.......

भले दहेज बिनु हम मारल जाइबि । दुःख होई केतनो ना तोहसे बताइबि ।।

माई हमरो के डोलिया कँहार दे दऽ । माई........