Family Values
दुलार के करी
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
हमरी माई अइसन हनके दुलार के करी। बिना स्वारथ के माई जइसन प्यार के करी ।।
दुर्गा-देवी केतना देवता मनवली। तब जाके गोदिया में हमरा के पवली ।।
ब्रत माई अइसन छठ-अतवार के करी। हमरी माई अइसन हमके दुलार के करी ।।
नजर ना लागे खातिर करेली कजरवा । हमके सुतावे के बिछावेली अँचरवा ।।
हमरी जीये खातिर बिनती हजार के करी, हमरी माई अइसन हमके दुलार के करी ।।
प्रथम गुरु बनि बोले के सिखवली। अंगुरी पकड़िके चले के सिखवली ।।
करिके उबटन टिकवा लिलार के करी। हमरी माई अइसन हमके दुलार के करी ।।
गंगा जल जइसन निर्मल बा मनवां। सरग बसेला माई के चरनवां ।।
जग में केहू नाहीं तुलना तोहार करी। हमरी माई अइसन हमके दुलार के करी ।।
ओराई, भराई ।। माई के करजिया कबो ना जनम जनम भरऽ तबो ना
सनेहिया के करजा उधार के करी। हमरी माई अइसन हमके दुलार के करी ।।
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जीवन परिचय
नाम : राम बहादुर 'अधीर पिण्डवी' पिता : (स्व०) श्री बसन्त पिण्डवी
सगे भाई की तरे
सबकी दुख सुख में रहीं सगे भाई की तरे। तबो अरिया चलावे लोग कसाई की तरे ।। धरती की लोगवा के सुख पहुँचाईं। देके दवाई सबके रोगवा भगाईं ।।
नीक परिवार वाली
गोरिया नीक लागे छपरा बिहार वाली। बोले भोजपुरी बोलिया पियार वाली ।। सासु जी के उठि सुति छूवे चरनिया। अपनी सुहाग के भरम राखे धनिया ।।