Farmers & Laborers
दूर देस बसे मोर सजनवां
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
दूर देस बसे मोर सजनवां हो, भेजे चिठियो ना तार।
कतहूं ना लागे मोर मनवां हो, तड़पे जियरा हमार ।।
जबसे सजन गइने मोर परदेसवा। लिहले खबरिया ना भेजे सनदेसवा ।।
भेजे नाहीं पतवा ठिकनवां हो, तड़पे जियरा हमार ।। दूर.............
केतना करार करि हमरा से गइने। सावन महिनवां में पिया नाहीं अइने ।।
आ गइल मास अब फगुनवा हो, तड़पे जियरा हमार ।। दूर...........
रहि-रहि हिचकी आवेला आँखि फड़के। नइखे बुझात कि करेजा काहे धड़के ।।
खनकेला राति के कंगनवां हो, तड़पे जियरा हमार ।। दूर.........
मनवा अधीर पिया कतहूं ना लागे। फगुनी बेयरिया बदन मोर दागे ।।
देईं हम केसे ओरहनवां हो, तड़पे जियरा हमार ।। दूर.........
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