Village Life
धरती मइया की अँचरा में
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
अनमोल रतन धन छीपल बा, धरती मइया की अँचरा में।
सबके किसमति भर मिलेला, रहेला जेतना बखरा में ।।
केहू सोना चानी पावेला, केहू खेतवा फसिल उगावेला ।
केहू राग द्वेष की लफड़ा में, पड़ि आपन समय गँवावेला ।।
मेहनत के नाम हवे लक्ष्मी, मिलि जाली मइया डगरा में ।। अनमोल....
पानी मोती के मीलेला, पौधन के मीले हरियाली।
केहू झोली भरि ले जाला, केहू के जेब रहे खाली ।।
सब आपन जतन लगावेला, पावेके रहे असरा में ।। अनमोल.......
सबके माँ आस पुरावेली, धन दौलति भी बरसावेली ।
राजा के रंक बनावेली, उल्लू के ताज पेन्हावेली ।।
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बड़ी भोली धरती माई ई, मुसुकाली ई तऽ झगरा में ।। अनमोल.....
केहू खूंटा खातिर लड़ि जाला, केहू डाँड़ मेड़ निपटावेला।
केहू व्यर्थ के पचड़ा में पड़िके, धन आपन व्यर्थ गँवावेला ।।
मुसुकात रहें पर दूर रहें, ना जाली ओकरी पैंजरा में ।। अनमोल...
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