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Family Values

नइहर से नाता छूटेला

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

डोलिया लेके अइले कहरवा, अब नइहर से नाता छूटेला।

तनी हमके ओढ़ा द अचरवा, लाज के सारा बन्धन टूटेला ।।........

माई हमरी रोवे, बाप हमरो रोवे। सब टोला मुहल्ला पड़ोसी रोवे ।।

मोर भइया रोवेला दुअरवा, साथ बहिना के हमरी छूटेला ।।......

सब सखिया सहेली रोवेली खड़ी। मोरी भाभी खड़ी जइसे पत्थर जड़ी ।।

मोर इयरवा छुपल बा अन्हरवा, भगिया ओकर जइसे फुटेला ।।.........

पी के घरवा पहुंचि के लजाइबि हम का। हम आपन कसुरवा बताइबि अब का ।।

चली मरजी की आगे ना उनकी, जवन सगरी धनवा लूटेला ।।.......