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Patriotism

कवनो अइसन दिया बनी

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

कवनो अइसन दिया बनि सकीं तऽ बनीं। सनेह के रोशनी हम बनिके जलीं ।।

उम्र होखे भले कुछ पल कुछु घड़ी, बस अंधेरा मिटे मोम सा हम गलीं ।।

प्रीति के रीति सबके सिखावल करीं। मंदिरों में जरीं मस्जिदो में बरीं ।।

भाई चारा बनीं आपसी मेल हो, छलि जाईं भले ना केहू के छलीं ।।......

केहू भूलल हो ओकर सहारा बनीं। नाव डूबत हो ओकर किनारा बनीं ।।

जग के उजियार हम करि सकीं त करीं, हम भले रोशनी के बिना ही पलीं ।।...

हऽ दिया नाम हमरो दिया ही करीं। कवनो थाती ना अपनी लिये हम धरीं ।।

दे सकीं प्राण भी देश हित के लिए, हम सदा धर्म की राह पर ही चलीं ।।....