Village Life
हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ सजना। मनवा भावेला रंगवा दूसर कवनो ना ।।
एक ही बसन्ती रंग मन मोरी भावे। दूसर रंग कवनो समझ नाही आवे ।।
ओइपर जय हिन्द तू लिखवा दऽ सजना ।।.......
नोकरी करेलऽ पिया तू त पलटनिया। घूमि-घूमि देखेलऽ तू सब दुनिया ।।
हमके करगिल तू अबकी देखादऽ सजना ।।......
एटम बम के कमी इहवां ना बाटे। अबकी लगाइ देइबि दुसमन के घाटे ।।
हमरो हथवा बन्दुखिया थम्हादऽ सजना ।।......
बड़ी मनमोल बाँटे देशवा के माटी। कन्या कुमारी होखे चाहे होखे घाटी ।।
साफ दुस्मनवाँ के बतादऽ सजना ।।........
Related
More from Village Life
सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।