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Village Life

हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

हमके चुनरी बसन्ती मँगवा दऽ सजना। मनवा भावेला रंगवा दूसर कवनो ना ।।

एक ही बसन्ती रंग मन मोरी भावे। दूसर रंग कवनो समझ नाही आवे ।।

ओइपर जय हिन्द तू लिखवा दऽ सजना ।।.......

नोकरी करेलऽ पिया तू त पलटनिया। घूमि-घूमि देखेलऽ तू सब दुनिया ।।

हमके करगिल तू अबकी देखादऽ सजना ।।......

एटम बम के कमी इहवां ना बाटे। अबकी लगाइ देइबि दुसमन के घाटे ।।

हमरो हथवा बन्दुखिया थम्हादऽ सजना ।।......

बड़ी मनमोल बाँटे देशवा के माटी। कन्या कुमारी होखे चाहे होखे घाटी ।।

साफ दुस्मनवाँ के बतादऽ सजना ।।........