Reflections
हमके मुरलिया बनाके
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
श्याम हमके मुरलिया बनाके, अधर से लगाके रखिह ऽ।
कवनो धुन में तू चाहे बजाके, कमर से लटकाके रखिहऽ ।।........
हमरो जनम होखे ओही बसवरिया। जवनी बँसवा के बनेला बसुरिया ।।
सातो सुर के छेदवा कराके, मधुर धुन बजाके रखिहऽ ।।.........
मोर मुकुट हम बने नाहीं चाहीं। माथे तोहरी चढ़े नाहीं चाहीं ।।
माल बैजन्ती हमके बना के, हृदय से लगाके रखिहऽ ।।..........
मन चाहे बनतीं कमर के करधनियां। चाहे मन बनती पयरन के पयजनियां ।।
एको छन ना हमे बिसराके, चरन से लगाके रखिहऽ ।।..........
मनवां 'अधीर' दरस बिनु तोहरी । के लेई सुधिया श्याम बिनु हमरी ।।
वृन्दा बन के कोयलिया बनाके, राधेश्याम रटा के रखिह ऽ ।।
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