Village Life
भइया हमार जनि भूलि जइहऽ
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
अबकी राखी में तू जरूर अइह ऽ। भइया हमार जनि भूलि जइहऽ ।।
सावन में सहेली सब आइल होइहें गाँव में। झुलुआ तऽ पड़ल होई अमवां की छाँव में ।।
सबके खबरिया भइया लेले अइहऽ ।।.........
आइल बाड़ी ललिता कि बाड़ी ससुराल में। रधिका त आइल होइहें सखी हरहाल में ।।
गुड़िया के हाल चाल लेके अइहऽ ।।..........
घरवा के लोग याद करेला कि नाहीं। चर्चा हमार कबो होखेला कि नाहीं ।।
चन्दा के साथे अपनी लेले अइहऽ ।।....
अंकित तऽ अब स्कूले जात होई। निखिल जरूर आवे खातिर रोवत होई ।।
अम्मा भाभी के तू बताके अइह ऽ ।।
रेशम के धागा बान्हबि तोहरी कलइया। लेइबि हजार भइया तोहरो बलइया ।।
रखिया कलइया तू बन्हाके जइहऽ ।।.........
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
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