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Village Life

बगिया वीरान होइ जाई

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

एही तरे होत रही पेड़ के कटाई, तऽ गउवां के बगिया वीरान होइ जाई।

जाई उजड़ि खग कुल के बसेरा। जिनगी में हो जाई सबकी अंधेरा ।। .

तब सांसत में सबके परान होइ जाई, जो गउवां के बगिया वीरान होइ जाई ।......

पीपर, बर, आम, महुआ, जमुनिया, गूलर, पाकड़, सीसमवा, निमिया ।।

बिनु पेड़वा के चली कइसे पुरुवाई, तऽ गउवां के बगिया वीरान होइ जाई......

औषधि के वृक्ष भरपूर हऽ खजाना। भोगे के पड़ी एकर हरजाना ।।

बिनु एकरी मिली ना केहू के दवाई, जो गउवां के बगिया वीरान होइ जाई ।......

जनि काट पेड़ नया औरी लगावऽ। देशवा से अपनी प्रदूषण भगावऽ''

तबे सुख के नीमन विहान तऽ गउवां के बगिया"