Village Life
बगिया उजारि जइबू
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
बबुनी भोर होत जब ससुरार जइबू। हमरी अँगना के बगिया उजारि जइबू ।।
बेला चमेली के नाजुक फूल जइसे। तोहरी सुरतिया बिसारि देई कइसे ।।
केके अंगना के हमरी बहार जइबू ।।.............
तोहरी सुरति से अंजोर घर अंगना। अंखिया में रहेलू बसल जइसे सपना ।।
घर के कोना-कोना करिके अन्हार जइबू ।।.......
छोट जब रहलू पियार बोल बोलिया। छोड़ि चलि जइबू बइठि तू तऽ डोलिया ।।
तू तऽ सबके सनेहिया बिसारि जइबू ।।...........
विधि के विधान दान तोहरा के देके। होखेलू विदा आशीष लाख लेके ।।
आँसू मोतिया समान तू ढार जइबू ।।.........
Related
More from Village Life
सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।