Village Life
केहू मनके नगरिया
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
लूटि ले गइल केहू मन के नगरिया। दिल के दिवाना बनाके सँवरिया ।।.........
अँखिया की पुतलिन से दिल में समाके। अपनी पिरितिया के जादू चलाके ।।
तनिको भइल ना, दिल के खबरिया ।। लूटिले..........
सुधि बुधि हेराइल सजनवां की प्यार में। बीति गइल रतिया करत इन्तजार में ।।
सजना बसल कवनी, जाके शहरिया ।। लूटिले.....
मन की बगिया के फुलवा फुलाइल। आवारा भौंरा बा मन बउराइल ।।
निकलीं डर से ना, दिन दुपहरिया ।। लूटिले.........
बहुते 'अधीर' बा सजन बिनु मनवां। कब होई पूरा अब मन के सपनवां ।।
हँसी उड़ावेला सगरी नगरिया ।। लूटिले.
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
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