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Reflections

होली में जरूर चलि अइहऽ

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

रेलिया से अइहऽ चाहें जहजिया से अइह ऽ। मोर बलमुआ हो, होली में जरूर चलि अइह ऽ ।।

रंग गुलाल, पिचुकारी लेले अइहऽ। हमके बसन्ती रंग सारी लेले अइह ऽ ।।

होली आके अबकी तू घरही मनइहऽ ।। मोर........

बोलिया कोयलिया के मन तरसावेला। पपिहा भी पी-कहाँ, पी-कहाँ गावेला ।।

गुनगुन भँवरवा के सुनि चलि अइह ऽ ।। मोर..........

आम मोजराइल, महुआ कोंचाइल। अंग-अंग हमरी जवानी गदराइल ।।

आपन सनेहिया तू हम पर लुटइहऽ ।। मोर..........

पछुआ हवा जब बहेला मन सनके। हरी-हरी चूड़िया कलइया के खनके ।।

मन बा अधीर जनि सनेसा तू पठइहऽ ।। मोर........