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Village Life

होली गीत

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

बतिया मानऽ तू हमरो सँव।ि ना डालऽ रंगवा घोरि-घोरि के।

तोहरी पइयाँ परीं हम सँवरिया, ना डालऽ रंगवा घोरि-घोरि के ।। बतिया.....

रंग, गुलाल गाल मलि-मलि के, कइ दिहलऽ तू लाल।

निरखि-निरखि तन तू पिचकारी, मारे लऽ नन्द लाल ।।

नाहीं तनिको शरम बा नजरिया, ना डाल रंगवा घोरि-घोरि के ।। बतिया.......

भीगि गइल मोरी चुनरी सारी, केतना श्याम अनारी।

फिरु सुनिके हम तोहरी मुरलिया, ना अइहौं गाँव तुम्हारी ।।

तूरि दिहलऽ कलइया के चूरिया, ना डालऽ रंगवा घोरि-घोरि के ।। बतिया........

तन मन रंग तोहरी रंगा के, कइसे हम जाईं बरसाना।

संग की सहेलिया जो पूछिहें त, कवन करबि हम बहाना ।।

तू तऽ हमके बनवलऽ बँवरिया। ना डालऽ रंगवा घोरि-घोरि के ।। बतिया...

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मइया यशोदा से कहि देबि जाके, अंग-रंग श्याम लगावें।

मानेना विनती हमरी एको, बहुते श्याम सतावें ।।

चाहे केतनो करीं गोड़धरिया, डालें रंगवा घोरि-घोरि के ।। बतिया....

कवनो ना कवनो बना के बहाना, तोहके बोलाइबि बरसाना।

चुनरी चोली सारी पेन्हाके, तोहके बनाइबि जनाना ।।

हम तोहके पेन्हाके घूँघरिया डालें रंगवा घोरि-घोरि के ।। बतिया........