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Family Values

हे माई ! रउरी अंचरा में

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

अनमोल रतन धन भरल बा, हे माई! रउरी अंचरा में।

सबके तऽ कुछु ना कुछु देनी, का बाटे हमरी बखरा में ।।

निर्धन के तऽ दउलति देके, निर्धनता दूर भगावेनी।

फिरु काहे हे मइया हमके, बिनु पइसा के तरसावेनी ।।

हमहूं तऽ अरज लगावेनी, रहेनी रउरी असरा में ।।........

सरस्वती हई रउरे बहिना, ऊ हम पर सनेह देखावेली।

जब ज्ञान देली त गीति लिखीं, महफिल में मान बढ़ावेली ।।

अब हम तऽ फैसल बानी इहवां, माई-मउसी की झगरा में ।।........

के बड़हन हऽ, के छोट हवे, ई बाति तऽ हम ना जानेनी।

हम रउवां के जेतना बड़ जानी, ओतने ही उनके मानेनी !

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हे माई ! गलती माँफ करीं, जनि डालीं हमके लफड़ा में ।।........

करि देती किरिपा तऽ ई जिनगी, कुछु हमरो माई संवरि जाइत।

जिनगी के नाव फंसल बाटे, हे माई पार उतरि जाइत ।।

हे मातु सरस्वती माँ के संग, आ जइतीं हमरी कटरा में ।।........