Family Values
वन्दना
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
तनी सुनि लीं अरजिया हमार हो, हमरी मइया सारदा ।
रउवां जिनगी के हमरी आधार हो, हमरी मइया सारदा ।।
हंस के सवारी राउर धवल चुनरिया। अंगुरी में शोभेला माणिक मुनरिया ।।
शोभे हथवा में रउरी सितार हो, हमरी मइया सारदा।। तनी .......... ।।
रउरी कृपा से फूले फूल फुलवरिया। रतिया के चान, होखे दिन दुपहरिया ।।
चले रउरी कृपा से संसार हो, हमरी मइया सारदा।। तनी ...... ।।
देई गियान कि राउर गीति गाई। गा-गा के गुन हम जग के बताई ।।
आवे सभवा में सुनि के बहार हो, हमरी मइया सारदा ।। तनी ...... ।।
गीत, गजल, छन्द के माई वरदान दीं। स्वर-लय-ताल में बधल माई ज्ञान दीं ।।
बस एतने अरजिया हमार हो, हमरी मइया सारदा ।। तनी ...... ।।
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जीवन परिचय
नाम : राम बहादुर 'अधीर पिण्डवी' पिता : (स्व०) श्री बसन्त पिण्डवी
दुलार के करी
हमरी माई अइसन हनके दुलार के करी। बिना स्वारथ के माई जइसन प्यार के करी ।। दुर्गा-देवी केतना देवता मनवली। तब जाके गोदिया में हमरा के पवली ।।
सगे भाई की तरे
सबकी दुख सुख में रहीं सगे भाई की तरे। तबो अरिया चलावे लोग कसाई की तरे ।। धरती की लोगवा के सुख पहुँचाईं। देके दवाई सबके रोगवा भगाईं ।।