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Village Life

मन बसन्ती हमार हो गइल

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

मन बसन्ती हमार हो गइल, रंग बरसेला अब तऽ फगुनवां में।

नाहीं अइलऽ मन का तोहार हो गइल, मन तरसेला सजना फगुनवां मे ।।.......

आइल बसन्त महकि गइल बगिया, फूल फूलवरिया फुलाइल ।

फुलवा के देखिके लोभाइल भँवरवा, कली-कली मुसकाइल ।।

व्याकुल मनवा हो जाला हमरो, निरखि निरखि के फगुनवा में ।।.........

अमिया बगिया के बा मोजराइल, छिमिया खेत गदराइल ।

छम-छम अरहर बजावे पयलिया, खेतवा सरसो फुलाइल ।।

पपिहा के बोलिया मन तड़पावे, सुनि-सुनि सजना फगुनवा में ।।..........

सेमर फूले पलास फूले बगिया, गीत कोयलिया गावे।

लागे जिया पिया नहि कतहूं, घर अंगना ना भावे ।।

सूनी सेज बोलावे तोहके, निरमोहिया अब फगुनवा में ।।..........