Village Life
बहेला विकास के बेयरिया
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
अब बहेला विकास के बेयरिया, शहरिया से कम नाही गउवां।
जरे बिजुली दुवरिया-दुवरिया। शहरिया से कम नाही गउवां ।।
टेलीफोन गाँव-गाँव अब तऽ लगेला । प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गाँव में खुलेला ।।
टी.वी., रेडियो से मिलेला खबरिया ।।.......
आधुनिक विधि से होखेला किसानी । खेतवा में चले टिउबेलिया से पानी ।।
बहे गउवां की नियरे नहरिया ।।.........
इन्दिरा आवास संडास सरकारी। बनि गइल गाँव में गरीब की दुआरी ।।
अब जाली नाही बहरे मेहरिया ।।.......
रोजी रोजगार खातिर करजा मिलत बा। गाँव के विकास खातिर बैंक खुलत बा ।।
मति जा साहूकार की दुअरिया ।।.........
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।