Village Life
बदनाम कइसे होई
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
बगिया बबुरी लगइबऽ तऽ आम कइसे होई। साथ सन्तन के कबो बदनाम कइसे होई ।।
माई-बाप के उपकार जे भुलाई। नरको में कतहूं सरन नाही पाई ।।
बिनु सेवा के इनकी चारो धाम कइसे होई ।।....
जवनी सुरतिया पर नीयति खराब बा। मनवा के तोहरी खूलत किताब बा ।।
धागा राखी के कबो बदनाम कइसे होई ।।......
जइसन करबऽ तू कीरति कमाई। जग के लोगवा तोहार गुन गाई ।।
हीरा मटिया में रहि बेदाम कइसे होई ।।...
एक तऽ करेला, दूसरे निमिया चढ़ल । मनवा में बा तोहरी जहर भरल ।।
अधीर मनवा पर तोहरी लगाम कइसे होई ।।......
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।