Village Life
चिट्ठी आइल बा
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
बहुते दिन के बाद गाँव से चिट्ठी आइल बा। अबकी अमिया खूब फरल छिमिया गदराइल बा ।।
ताल तलैया नदिया नाला, घन बरगद के छँहियां ।
नदी नहाए बाबा के संग, गइनी पइयां-पइयां ।।
जामुन के गँछिया देखि लदरल, मन ललचाइल बा ।। गाँव ...... ।।
रोज खेत से खोंटि चना के, आवत रहे भाजी।
केतना नीक पकावत रहली, चउका लीपि के आजी ।।
मडुआ के लिटिया के संग में, स्वाद लोभाइल बा ।। गाँव...... ।।
उखिया के रस राब अउर, ठण्डा कुंड्यां के पानी।
लरिकाई से पीके जवन, निखरल रहे जवानी ।।
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पुअरा पड़ल बिछौना सुख के, निदिया आइल बा ।। गाँव...... ।।
दूध दही अउर चना चबेना, माई रोज खिअवली ।
परियन के कथा कहानी, दादी रोज सुनवली ।।
दुअरा पर ललकी गइया के, दूध दुहाइल बा ।। गाँव...... ।।
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