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Village Life

कब देबू दरसनवा हो

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

हाथ जोड़ि तोहरा से करीं अरचनवा हो। हे माई कब देबू हमें दरसनवा हो ।।

गइया की गोबरा से अंगना लिपवनी। जगमग घिउवा के दिअना जरवनी ।।

फल-फूल नरियल कइनी अरपनवा हो ।।........

सोने के गड्डुअवा गंगा-जल मंगवनी। लाल-लाल चुनरी हम मइया रंगवनी ।।

हरवा मंगवनी मइया हम अढ़उलवा हो ।।.........

हितनात दोस्त मित्र नेवता पठवनी। गीतिया गावेके बहादुर के बोलवनी ।।

सारी रात होला मइया जगरनवां हो। हे माई कब देबू हमे दरसनवा हो ।।..........