Village Life
कब देबू दरसनवा हो
— राम बहादुर अधीर पिण्डवी
हाथ जोड़ि तोहरा से करीं अरचनवा हो। हे माई कब देबू हमें दरसनवा हो ।।
गइया की गोबरा से अंगना लिपवनी। जगमग घिउवा के दिअना जरवनी ।।
फल-फूल नरियल कइनी अरपनवा हो ।।........
सोने के गड्डुअवा गंगा-जल मंगवनी। लाल-लाल चुनरी हम मइया रंगवनी ।।
हरवा मंगवनी मइया हम अढ़उलवा हो ।।.........
हितनात दोस्त मित्र नेवता पठवनी। गीतिया गावेके बहादुर के बोलवनी ।।
सारी रात होला मइया जगरनवां हो। हे माई कब देबू हमे दरसनवा हो ।।..........
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सुधार नइखे
हमरी गउवां में तनिको सुधार नइखे । भाई-भाई में लड़ाई होला प्यार नइखे ।। पहिले के लोग सब एक में रहत रहे। मनवा के बाति सभे सबसे कहत रहे ।।
खिल उठे मनवा उदास
चढ़ते असढ़वा बरसे बदरवा, कि धरती के बूझेला पियासि । बड़ा नीक लागे हरियर दुबिया, खिलि उठे मनवा उदास ।।.......
शहरिया से गाँव हो
दुअरा पर निमिया के घन बाटे छाँव हो। बड़ा नीक लागेला शहरिया से गाँव हो ।। मंगरू भगत लागें गाँव भर के काका। बचनू कँहार लागें बुढ़वन के दादा ।।