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Village Life

हमार गाँव देखि लड

— राम बहादुर अधीर पिण्डवी

अब हो सके तऽ चलिके हमार गाँव देखि लऽ । ठण्डी हवा चले पीपल के छाँव देखि लऽ ।।

गउवां किनारे हमरी सरयू के धार बा। कई कोस में फैलल अबहूं कछार बा ।।

नौका बिहार के सजल नाव देखिल ।। अब हो...........

पुरुखन के निशानी बरगद पुरान बा। ओही की छाँव में हमरो मकान बा ।।

चौपाल लगे जहवां ऊ ठाँव देखिल ऽ। अब हो...........

स्कूल, बैंक, कालेज, अस्पताल खुलि गइल। पिछड़ल रहे कबो ऊ बाति चलि गइल ।।

विकास की दिशा में बढ़ल पाँव देखिलऽ । अब हो

शिक्षा में कम कहीं से ना हमरो गाँव बा। उपज बढ़ल बा सबमें आदर्श गाँव बा ।।

लहरे जहाँ फसिलिया धरि पाँव देखिलऽ। अब हो